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Muhammad aur Islam evam Bharat ka Bhavishya
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मुहम्मद और इस्लाम एवं भारत का भविष्य
लेखक- सच्चिदानंद चतुर्वेदी
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Description
मुहम्मद और इस्लाम एवं भारत का भविष्य
लेखक- सच्चिदानंद चतुर्वेदी
मुसलमानों से एक आग्रह —–
यदि आपने शुरू से इस पुस्तक को पढ़ ली है तो आप को यह बात अवश्य समझ में आई होगी कि आपके मौलवियों ने इस्लाम के बारे में आपको जो
जानकारी दी है, वास्त्तविकता उससे भिन्न है। क्योंकि इसमें दी गई बातें सभी इस्लामी साहित्य से ली गई प्रामाणिक बातें हैं, मौलवियों की तरह मनमौजी ढंग से बताई गई बातें नहीं हैं।
आपने देखा कि मोहम्मद ने अपने देश अरब, अपने कुल-वंश, और स्वयं अपने महत्व और सुख सुविधा के लिए सारी दुनिया को गुलाम बनाने की रणनीति के रूप में इस मजहब की नींव रखी थी।
जो लोग इस्लाम में शामिल हुए, स्वेच्छा से शामिल नहीं हुए, बल्कि उन्हें मजबूर कर या लोभ लालच देकर मुसलमान बनाया गया। कुछ धरती का और कुछ जन्नत का लोभ दिखाकर और कुछ दोज़ख़ का भय दिखाकर एवं नियंत्रण की व्यवस्था कर मजहब में बने रहने और जिहादी लड़ाई लड़ते रहने को बाध्य किया है। बचपन के पारिवारिक परिवेश, उन्मादी वातावरण, जिहादी क्रिया कलाप , प्रश्न पूछने और संदेह करने आदि पर रोक लगाने के कारण आप समझ ही नहीं पाते हैं कि यह मजहब आपके जीवन को एवं आपकी आने वाली पीढियों को कितना नुकसान पहुंचाता है। अरब की भलाई के लिए सारी दुनिया में मुसलमान पीढ़ी दर पीढ़ी अपने लोगों को दुख में डालते आ रहे हैं।
अब जमाना बदला है। लोगों को मजहबी विचारधारा के जिस पिंजरे में अब तक बंद किया हुआ था, वह अब खुला है। अब गंभीरता से सोचिए, सारी परिस्थितियों को समझने का प्रयास कीजिए और अपने आने वाली पीढियों के सुंदर भविष्य के लिए उचित निर्णय लीजिए। इस्लामी प्रभाव के कारण आप हमें भले ही दुश्मन समझते हों लेकिन हम जानते हैं कि आप हमी में से हैं। समय की मार ने आप के पूर्वजों को इस्लाम स्वीकार करने को विवश किया था। फिलहाल आप भले ही उसका अभ्यस्त बनकर उसकी गीत गा रहे हों, लेकिन यदि गंभीरता से विचार कीजिएगा तो आपको लगेगा कि यह मजहब आपको,आपके बच्चों को, और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा दुख में डालने वाला है। उससे बचने का एकमात्र मार्ग है इस्लाम का त्याग, इस्लाम को अब अलविदा कहिए। इस्लाम को छोड़िए और घर वापसी कीजिए। स्वयं सुख शांति से जीवन व्यतीत कीजिए और दूसरों को भी करने दीजिए।
आने वाली पीढ़ियों के लिए इस्लाम की व्यवस्थाएं कितनी विनाशकारी हैं इसे पीछे के पन्नों में दर्शाया जा चुका है। अपने बच्चों के भविष्य की चिंता कीजिए। मानवीय मूल्यों के विषय में सोचिए। संसार में अधिकांश लोग अज्ञानता के अंधकार में डूबे रहते हैं और कुछ चतुर लोग उनकी अज्ञानता का लाभ उठाकर अपना हित साधन करते हैं। काफी समय बाद और बहुत थोड़े लोग ही उनकी इस चतुराई को समझ पाते हैं, उनका पर्दाफाश करते हैं और तब बदलाव की प्रक्रिया शुरू होती है। इस्लाम के साथ भी यही हो रहा है। अब बहुतेरे लोग इस्लाम को समझने लगे हैं और इस्लाम को छोड़ने लगे हैं, आप भी उनका साथ दीजिए। एक्स मुस्लिमों से संपर्क बढ़ाइए। उनकी मीटिंग अपने मुहल्लों में कराइए और इस्लाम को समझने का प्रयास कीजिए। ऊपर कुरान से उद्धृत आयतें क्या आपको अपराध करने की शिक्षा नहीं देती हैं ? क्या अपराध करना धर्म है? यदि अपराध करना धर्म है तो अधर्म क्या है? आप जैसे ही ध्यान दे कर पढ़ना शुरू करेंगे आपको पता चलेगा कि इस्लाम परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग नहीं, बल्कि अरबी हित के लिए आपको अपराधी बनाने का मार्ग है। आप इस जंजाल में ऐसे फंस चुके हैं कि सब समझते हुए भी इससे बाहर निकलने में आपको काफी संघर्ष करना होगा। लेकिन मानवता के हित में संघर्ष कीजिए, अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कीजिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष कीजिए और इस्लाम से बाहर निकलिए।
पुस्तक को छोटा करने के कारण अनेक बातें छूट रही हैं जिन्हें आप अपने चिंतन से पूरा कीजिए। अपनी जीविका और संसार के उधेड़बुन में लगे अधिकांश लोग सुधारवादी क्रांतिकारी काम नहीं कर पाते। वे अपनी परंपराओं में उलझा जीवन व्यतीत करते हैं। कुछ ही लोग वैसे महान कार्य करते हैं जिससे मानवता का कल्याण होता है। आप में जिन लोगों का मस्तिष्क मजहबी शिक्षा और कुछ सांसारिक स्वार्थ के कारण दूषित है उनकी परवाह न करते हुए अपनी आवाज बुलंद कीजिए और मानवता के लिए अपने कल्याणकारी कर्तव्य को पूरा कीजिए। यह कर्तव्य है – इस्लाम का त्याग! इस्लाम का त्याग !! और इस्लाम का त्याग !!!
